कोई तितली हमारे पास आती तो क्यों आती, सजाये उमर भर, कागज के फूल और पत्तियां हमने : सिंह

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काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन
यमुनानगर। स्थानीय नेहरू पार्क में स्थित वरिष्ठ सदन के प्रांगण में स्वयं सेवी संस्था आपकी महफिल द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बारे में जानकारी देते हुऐ संस्था पदाधिकारी के.सी.ठाकुर एवं प्रधान शुरवीर सेठ ने संयुक्त रूप से बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर काव्य गोष्ठीयों, बाल सभाओं, कवि स मेलन आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें उर्दू, हिन्दी, पंजाबी आदि सहित्यों के कवियों को मंच प्रदान कर उनमें छुप्पी प्रतिभा को और अधिक निखारने का कार्य किया जाता है। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान शुरवीर सेठ द्वारा एवं मंच संचालन संस्था के महासचिव रमेश भारती द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रथम स. सुरिन्द्र सिंह द्वारा अपना कलाम प्रस्तुत किया गया।उन्होंने कहा कि समक्षते थे, मगर फिर भी न रखी दूरिया हम ने, चिरागो को जलाने में जला नी उंगलिया हम ने। कोई तितली हमारे पास आती तो क्यों आती, सजाऐं उमर भर, कागज के फूल और पत्तियां हमने, चिरागो को जलाने में जला नी उंगलिया हम ने। यह गज़ल सुन हाल तालियों से गुज उठा। जिसके बाद बाल मुकन्द मक्कर, स. मंजीत
सिंह, प्रो. के.सी.ठाकूर, रमेश भारती, रमेश वर्मा आदि कवियों द्वारा अपने-अपने विचारों से उपस्थित श्रोतायों को भाव विभोर किया गया। वहीं कार्यक्रम के अंत में संस्था प्रधान शुरवीर सेठ द्वारा कवियों तथा श्रोताओं को धन्यवाद कर सभी कवियों की तारीफ की गई व भुतपुर्व कवि लुभाया राम तायर, सागर अबोहरी, अर्श ज़लालाबादी आदि को याद किया गया ओर तायर साहब की नज़म के दो शेर पढ़े गऐ। जिसमें उन्होंने कहा कि एक दिन ायाल की –
मैं दुनियां बना रहा सी। मज़म्न दे फिकर विच-गीते लगा रहा सी।। चांहदा सा मै जगा लां, कोई बेमिसाल ज्योति। सिप्पी फिकर चुंकंडा कोई बेमिसाल मोती।। आदि प्रस्तुत किऐं गऐं।
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