करेड़ा खुर्द की रामलीला में दशरथ मरण- भरत मिलाप का मंचन

यमुनानगर। श्रीराम कला मन्दिर के बैनर तले गाँव करेड़ा खुर्द में नवरात्रि के प्रथम दिवस पर कलाकारों ने दशरथ मरण- भरत मिलाप का शानदार मंचन किया। नवरात्रों के मंगलमय आगमन पर मधुर सुर-ताल के साथ शक्ति स्वरूपा देवियों की सुंदर झाँकी ने लीलाप्रेमियों के नयन भक्तिरस से भर दिए। आज के मंचन में यमुनानागर विधायक घनश्याम दास के भाई विजय मानिकटाहला ने दीप प्रज्ज्वलित करके लीला का शुभारंभ करते हुए 11111/- रुपये प्रभु सेवा में अर्पित किये। उन्होंने उपस्थित दर्शकों को नवरात्रों की स्नेहिल शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इंसान का पूजन चित्र से नहीं बल्कि उसके चरित्र से होता है।
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रामायण जीवन जीना सिखाती है। श्रीराम समूचे संसार के लिए आदर्श हैं। उनके पदचिन्हों का अनुगमन करके हम सब इहलोक और परलोक दोनों को सुधार सकते हैं। आज पाँचवें दिन श्रीरामचरितमानस के इस मार्मिक प्रसंग में श्रीराम, वैदेही सीता व यति लक्ष्मण निषादराज के साथ गंगातट पहुंचते हैं; जहाँ केवट उन्हें नाव में गंगा पार कराने के लिए यह कहते हुए मना कर देता है कि आपकी चरण रज से जब एक शीला भी नारी का रूप धर सकती है तो प्रभु मेरी तो काठ की नाव है। मुझे चरण पखारने की आज्ञा दें तो आपको गंगा पार करा दूँ। राम – केवट संवाद व गंगा पार का ये दृश्य इतना मार्मिक था कि पूरा पांडाल दर्शकों की करतल से गूँज उठा। उधर राम वियोग में भूपति दशरथ अयोध्या में प्राण त्याग देते हैं। तब भरत व शत्रुघ्न नाना के घर से वहाँ आते हैं और समूचा वृत्तांत सुनकर कैकेयी और मन्थरा को बहुत भला बुरा कहते हैं।
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राजा दशरथ के क्रिया कर्म के बाद कैकेयीनन्दन भरत कुटुंब सहित रघुकुल शिरोमणि राम को मनाने के लिए चित्रकूट पहुँचते हैं। जहाँ प्रभु श्रीराम चरण पादुका देकर भ्राता भरत को वापिस भेज देते हैं तथा पितृ-आज्ञा पालन की सीख देते हैं। कौशल्यवत्स श्रीराम और कैकेयीवत्स भरत के इस भ्रातृ प्रेम को देखकर दर्शक गद्गद् हो उठे। पावन लीला के पश्चात् सैनी परिवार की ओर से समस्त कलाकारों के लिए रात्रि भोज की व्यवस्था की गई। श्रीराम का रोल पारस मानिकटाहला ने, लक्ष्मण का राकेश कश्यप, सीता का पंकज, भरत का राजकुमार मिगलानी, दशरथ का मदन शर्मा, केवट का अशोक शर्मा ने बखूबी निभाया। इस दौरान रामलीला मंचन में प्रधान अशोक मानिकटाहला, चीफ एडवाइजर अनिल शर्मा, डायरेक्टर मदन शर्मा, शिवशंकर , चैतन्य, नीरज मानिकटाहला, राजा, अतिरेक मसीह, अदरीस अहमद, महेंद्र सिंह मक्कड़, राम कुमार, पप्पी मक्कड़, किशोर शर्मा, रोहित शर्मा, राजू खरबंदा कमलजीत, मंगा मक्कड़ आदि ने भरपूर सहयोग दिया।
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