सत्संग ही जीवन का वास्तविक आनंद है : स्वामी ज्ञानानंद

यमुनानगर/साढौरा। सत्संग ही जीवन का वास्तविक आनंद होने के अलावा सत्संग करने से जीवन को सही दिशा मिलने से आनंद की प्राप्ति होती है। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी ने हिन्दू स्कूल में आयोजित तीन दिवसीय दिव्य गीता सत्संग के समापन सत्र में यह बात कही। इससे पूर्व पंजाबी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक मेहता व हरप्रीत सिंह बतरा ने दीप प्रज्जवलित करके सत्संग का शुभारंभ किया। स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि सत्संग के बाद से मानव के जीवन में सात्वीक परिवर्तन आ जाता है। सत्संग से जीवन जीने का तरीका बदल जाता है।
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उन्होंने कहा कि सभी की इच्छाएं अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन सभी लोग मानसिक शांति व आंनद की कामना करते हैं। हर आदमी सुख संपति की कामना करता है लेकिन इससे भी ज्यादा जरुरी सन्मति का आना होता है। स्वामी ज्ञानानंद जी ने कहा कि बुद्धि से मानव को अच्छे-बुरे की पहचान हो जाती है। सदबुद्धि आने से जीवन सुधर जाता है। इसलिए मानव को सुख संपति के साथ-साथ सदबुद्धि की भी कामना करनी चाहिए। मंच संचालक ओमप्रकाश चुघ ने स्वर्गीय दीपराज चुघ द्वारा इस क्षेत्र में गीता ज्ञान के प्रचार-प्रसार व श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति की स्थापना में दिए गए सहयोग को याद करते हुए उन्हें श्रद्ध सुमन भेंट किए। मौके पर पंजाबी महासभा के प्रधान सूरज ओबराए, जीवंद राम चुघ, गुलशन गांधी, सचदेव चुघ, सुधीर घई, सुधीर भल्ला, पंकज चुघ, उज्जल सिंह बाजवा व राजेन्द्र चानना मौजूद थे।
रिपोर्ट : शिवम अग्रवाल
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