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यमुना नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ राहत कार्यों के लिए नहीं आया बजट

गाँव में कई साल पहले बने स्टड के अवशेष
खिजराबाद। सिंचाई विभाग द्वारा बाढ राहत कार्यों के लिए जिले में २५ साईडें निर्धारित की गई हैं जिनके लिए सिंचाई विभाग की ओर से लगभग १२ करोड का बजट जारी किया गया है। सिंचाई विभाग द्वारा जारी इन २५ साईडों में सभी की सभी घाड क्षेत्रों के लिए ही बजट आया है। यमुना नदी के किनारे बसे गांवों के लिए किसी भी गांव के लिए बाढ राहत के लिए बजट नही आया। इससे यमुना किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोगों में रोष है। ग्रामीण पहल सिंह,संजीव कुमार,नरेश कुमार,दीपचंद आदि का कहना है कि यमुना नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों में हर साल बाढ का पानी तबाही मचाता है। बेलगढ और कन्यावाला के आसपास होने वाले अवैद्य खनन से यमुना नदी के किनारे कमजोर हो गए है जिसकी वजह से यमुना में यदि बाढ आ गई तो बाढ का पानी यमुना नदी के किनारे बसे गांवें में कहर बरपा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग को अब की बार भी बेलगढ के साथ लगते बांध की सुरक्षा को देखते हुए बाढ राहत कार्य के लिए बजट जारी करना चाहिए था जिससे बांध तो पक्के होते ही साथ ही अधिकारियों के आवागमन से अवैद्य खनन पर भी कुछ लगाम कसी जाती। बरसाती सीजन आने पर यमुना नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को रात में बाढ के पानी आने का खतरा बना रहता है। वर्ष २०१० में आई बाढ ने यमुनानदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के लोगों के आशियाने बहा दिए थे जिससे दर्जनों गांव के ग्रामीणों को जिला सचिवालय के प्रांगण में कई दिन गुजारने पडे थे। ग्रामीणों का कहना है कि बेलगढ और आसपास के क्षेत्रों में खनन होने से यमुनानदी के किनारे कमजोर हो रहे हैं और खनन होने से पुराने लगे स्टड भी ध्वस्त हो गए। दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए था कि घाड क्षेत्र के साथ साथ यमुनानदी के किनारे बसे गांवों के लिए भी बाढ राहत कार्य होने चाहिए थे।
गाँव में कई साल पहले बने स्टड के अवशेष
गाँव में कई साल पहले बने स्टड के अवशेष
क्‍या कहते है अधिकारी :
सिंचाई विभाग के एसई एसडी शर्मा का कहना है कि जरूरी नहीं है कि हर गांव के लिए ग्रांट आए। जहां जरूरी है, वहां स्‍टड बनाए जा रहे हैं।

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