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Yamunanagar : एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत हुई बैठक

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Yamunanagar Hulchul : एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत जिला सचिवालय के सभाकक्ष में उपायुक्त पार्थ गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग, महिला व बाल विकास विभाग व शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिला में एनीमिया से ग्रस्त बच्चों व महिलाओं की पहचान कर उन्हें उचित चिकित्सा सलाह व दवायें-उपचार उपलब्ध कराना है।  इस बैठक के दौरान सिविल सर्जन डॉ. दहिया ने ”बच्चों व महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता विषय पर प्रस्तुति दी तथा जिला में एनीमिया की स्थिति बारे उप-सिविल सर्जन डॉ. विजय परमार ने पी.पी.टी. प्रेजैन्टेशन के माध्यम से जानकारी प्रदान की।

बैठक में उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि देश को एनीमिया मुक्त बनाने के लिये सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके चलते जिला यमुनानगर में भी एनीमिया से ग्रस्त लोगों की पहचान कर उचित उपचार उपलब्ध कराया  जायेगा।  उन्होंने बताया कि जिला में इस कार्य के लिये एक कमेटी का गठन किया गया है जिसमें स्वास्थ्य विभाग, महिला व बाल विकास विभाग व शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यरत रहेंगे।

सरकारी व निजी विद्यालयों के साथ-साथ जिला में अन्य बच्चों व महिलाओं की जॉंच कर एनीमिया ग्रस्त नागरिकों की पहचान करेंगे। उन्होने बताया कि एनीमिया पाये जाने पर मरीज में स्वास्थ्य व खानपान सम्बंधी सलाह के साथ-साथ दवाओं द्वारा भी एनीमिया का उपचार किया जायेगा। उन्होंने एनीमिया टैस्टिंग मशीन की कार्यशैली व दवाईयों को भी देखा। उन्होंने निर्देश दिया कि सम्बधिंत अधिकारी टीम बनाकर एनीमिया के बारे में मॉनिटरिंग करें और 15 दिन में रिपोर्ट उन्हें सौंपे। उन्होंने निर्देश दिए कि मार्च 2022 के अंत तक दो बार सभी की एनीमिया टैस्टिंग कराई जाए।

सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया ने बताया कि एनीमिया के तहत बच्चों व महिलाओं को 6 भागों में बाँटा जाता है जिनमें बच्चों में 6 माह से 59 माह तक के बच्चों को पहली श्रेणी में, 6 साल से 9 वर्ष तक के बच्चों को दूसरी श्रेणी में, 9 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को तीसरी श्रेणी में तथा इसके उपरान्त 19 वर्ष से 24 वर्ष तक की लडकियों व महिलाओं को लिया जाता है जिसके तहत ग्रर्भावस्था में महिलाओं व दूध पिलाने वाली महिलाओं को एक श्रेणी में व इसके अलावा सभी विवाहित महिलाओं को रखा जाता है तथा श्रेणी अनुसार ही चिकित्सा सलाह व उपचार किया जाता है।
डॉ. दहिया ने बताया कि आंकडों के अनुसार जन्म से 59 माह तक के बच्चों में 2015 में 58 प्रतिशत बच्चों में एनीमिया पाया गया था, जो कि अब बढ कर 72.9 प्रतिशत हो गया है। इसके साथ ही ग्रर्भवती महिलाओं में 2015 में 55 प्रतिशत महिलओं में एनीमिया पाया गया था। जो कि अब बढ कर 62 प्रतिशत हो गया है।
अत: सिविल सर्जन ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत एनीमिया कार्यक्रम के तहत जिले में एनीमिक लोगों की पहचान, पूर्ण जॉंच व स्वास्थ्य सलाह के साथ साथ उचित उपचार भी किया जायेगा, जिसके तहत आईरन की दवा व सप्लीमैन्ट प्रदान किये जायेंगे। इस अवसर पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी आरडी गागट, आईएमए से डॉ. सोनी, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. बुलबुल सहित अन्य विभागों के अधिकारी व स्वास्थ्य विभाग के डाक्टर व अधिकारी उपस्थित थे।
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