
इस अनुचित फैसले से पहले से ही बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के सामने स्थायी रोजगार का संकट पैदा हो जाएगा। इस बीच यमुनानागर हसला की ओर से प्रधान परमजीत सिंह संधू ने कहा कि सभी सत्तासीन सरकारों का ये दायित्त्व बनता है कि वे जनहितैषी कार्यों को प्राथमिकता दें। किन्तु बड़े अफ़सोस की बात है कि चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे करने वाली भाजपा सरकार सरकारी विभागों को धीरे-धीरे निजीकरण की ओर धकेल रही है। खट्टर सरकार के इस अनुचित कदम से न केवल तमाम कर्मचारियों में रोष व्याप्त है बल्कि सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठा युवा वर्ग भी आहत है। रा0 प्रा0 शि0 संघ के राज्य संयोजक सरदार जगजीत सिंह ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि कर्मचारियों का संघर्ष अपनी मांगों को लेकर नहीं है अपितु रोडवेज़ का सरकारी महकमा बचाने का है।
प्राइवेट सेक्टर में आमजन के हित सुरक्षित नहीं हैं। लिहाजा सरकार को सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाकर कर्मचारियों के साथ सकारात्मक बातचीत कर मुद्दे को हल करना चाहिए। ह0 वि0 अ0 संघ की ओर से राकेश धनखड़ ने भी अपने विचार रखे। इसके तुरंत बाद संयुक्त शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले सभी शिक्षक संगठनों ने सरनी चौक पर स्थित भगत सिंह पार्क से रोषपूर्ण रैली निकालते हुए बस स्टैंड पोस्ट ऑफिस के नजदीक धरना- प्रदर्शन कर रहे हरियाणा रोडवेज़ कर्मचारियों को कंधे से कंधा मिलाते हुए अपना पूर्ण समर्थन दिया। इस मौके पर पूर्व हसला मुखिया वेद प्रकाश, हसला महासचिव शशिकान्त चौधरी, राजेश अत्री, रोहताश राणा, कुलवंत, नीरज मानिकटाहला, गोबिंद सिंह भाटिया, राजेश वर्मा, राजीव राणा उन्हेड़ी, विनोद सैनी, संत, विकास आदि मौजूद थे।